प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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खुशी के पल अगर पाओ, निकलने मत उन्हें देना।
सहेजो आप नित उनको, फिसलने मत उन्हें देना।
करो संतोष उसमें ही, खुशी जितनी मिले हम को।
करें हिम खण्ड जो शीतल, पिघलने मत उन्हें देना।
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दिवस चतुर्थी आज है, गणपति आये द्वार। 
धूप दीप मोदक तिलक, पुष्प दूब का हार।।1
स्वागत को आतुर सभी, सजते हैं पंडाल। 
फूलों की माला सजे, तिलक सोहता भाल।।2 
गणपति की आराधना, मिलकर करते लोग। 
स्थापित कर पूजन करें, और लगायें भोग।।3
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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