प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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हृदय विकल हैं आजकल, विकट करोना काल।
घर में पूजन आपका, हे शिवगौरी लाल।।
भक्ति भाव से घर गली, पूजें गणपति आज।
लंबोदर आशीष दें, खुशियों का हो राज ।।
आदि देव प्रभु को कहें, सर्वप्रथम लें नाम।
लंबोदर को पूज कर, करते बाकी काम।।
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गौरी सुत हर वर्ष घर, खुशियाँ लाते संग।
उत्सव में तन मन रँगे, भरती नवल उमंग।।
श्री गणेश मंगल करें, दूर सभी संताप।
भक्तजनों में व्यापते, नहीं कभी भवताप।।
आते हैं हर साल वह, हो उत्सव की धूम।
मंगलमय सुर-ताल से, तनमन जाते झूम।।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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