प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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रिश्तों के ना जाने कितने, पहलू सब को दिखते हैं।
द्वेष, प्रेम ,कटुता, करुणा के, भाव हृदय में रहते हैं।
इंसानों पर ही निर्भर है, कौन भाव पोषित करना,
गलत आचरण मानवता के, अक्सर दिखते रहते हैं।।
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बेटे-बेटी में कभी, भेद न करिये आप।
तुलना जो इनकी करें, वो करते हैं पाप।।
बेटे घर की शान यदि, बेटी घर की मान।
इन दोनों में ही बसे मात-पिता की जान।।
बेटे को संस्कार दें, उत्तम रखे विचार।
सक्षम बेटी को करें, जो उत्तम उपहार।।
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रंगों के शुभ संयोजन से, चित्र अनेकों बनते हैं।
आड़ी-तिरछी रेखाओं में, बिंब छिपे कुछ रहते हैं।
भावों को रंगों में घोलें, चित्र बोलते अपने आप,
चित्र बोलते मौन स्वरों में, अंतस सदा उतरते हैं।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/ उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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