प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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हर तरफ पसरा तिमिर आलोक की दरकार है।
लौ जला कर तम भगाना ही सही प्रतिकार है।
शक्तिशाली है समझता खुद मनुज संसार में,
इसलिए वह कर रहा प्रतिदिन अजब व्यवहार है।
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करें दिल से सभी विश्वास, नूतन नव सुधारों में।
भरोसा काम पर ही हो, नहीं हो मात्र नारों में।
भला इंसान वो होता, करे नित कर्म जो अच्छा,
सदा हो आचरण सुंदर, रहे शुचिता विचारों में।
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प्रकृति दिखाती रंग अनूठे, मानो या मत मानो।
अंतस कोमल सबका होता, तनिक उसे पहचानो।
ममता की धारा बहती है, हर प्राणी के अंदर,
राग-द्वेष के बन्ध लगा कर, मत रोको नादानों।
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आज कल औकात में रहता नहीं है आदमी।
क्यों किसी की रूह को छूता नहीं है आदमी।
अब लड़े इंसान देखो बस ज़रा सी बात पर,
रोकने से भी कभी रुकता नहीं है आदमी।।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव (उ प्र) 

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