प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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धरती बहुत अकुला रही हर ओर है पाखंड।
जीवन कठिन नित हो रहा आतंक आज प्रचंड।

भटका हुआ मानव धरा को कर रहा है नष्ट,
करनी मनुज की दे रही सब प्राणियों को कष्ट।

करता हृदय से कामना जीवन सँवारो आप,
शुचिता बसे हर व्यक्ति में जिससे मिटे संताप।

आराधना प्रभु से करें, दे दें हमें शुभ ज्ञान,
राक्षस बहुत अब बन लिया फिर से बने इंसान।

- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव
 

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