प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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नीति वचन जग में सदा, दिखलाते शुभ राह।
यदि  इनका  पालन करें, भरता  नव उत्साह।।

संग बसें यदि प्रभु हृदय, होंगे सब शुभ कर्म।
कार्य सकल होंगे सफल, नीति बताती मर्म।।

अपने मन को साध लें, इसकी चंचल जात।
बेलगाम  यदि यह  रहे,  बिगड़े बनती बात।।

संयम से सब काम लें,  करके  ठोस उपाय।
जीवन सर्व सँवार लें, बिना किये अन्याय।।

संस्कृति की रक्षा करें, यह आवश्यक आज।
आयातित कुविचार से, रक्षित करें समाज।।

आँख मूँद अपना रहे, अंध सभ्यता लोग।
संस्कारों को त्याग कर, करते नव्य प्रयोग।।

अंतर रीति-कुरीति का, समझे अगर समाज।
तज कर सर्व बुराइयां, सभ्य बनेगा आज।।

अच्छाई  पोषित करें, कलुष भगाएं दूर।
सामाजिक समता  बढ़े, खुशियाँ हों भरपूर।।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव उत्तर प्रदेश 
 

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