प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी 

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पुनः मनाएँ लोहड़ी, घर में रह इस बार।
विपदाएँ सब दूर हों, तभी मने त्योहार।।

मूँगफली सँग रेवड़ी, आज चढ़ायें भोग।
अग्नि देव को खुश करें, पूजन कर सब लोग।।

सावधान हो कर सभी, धरिये बाहर पैर। 
आपस में दूरी रखें, अपने हों या गैर।।
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दक्षिण से प्रस्थान कर, चलते उत्तर ओर।
दिनकर जी धनु राशि से, पड़े मकर पर जोर।। 

नदियों में सब स्नान कर, यथायोग्य दें दान।
मन मे करते प्रार्थना, मिले ईश वरदान।। 

खिचड़ी, या चिड़वा-दही, इनसे लगता भोग।
संग अन्य पकवान का, स्वाद उठाते लोग।।
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शुभ उत्तरायण पर्व को संक्रांति कह पूजा करें।
धनु से मकर में कर गमन आदित्य हर घर को भरें।

स्नान पूजन दान संग मना रहे सब पर्व को।
दिनकर दिवाकर कर कृपा भवताप जग के नित हरें।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव,उत्तर प्रदेश
 

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