प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रश्न उठे हर मानस में रहते पहले प्रभु राम कहाँ पे।
तीर्थ बना वह क्षेत्र पुनीत लला जनमें उस रोज जहां पे।
अर्पित भक्त करें धनधान्य बने नव मंदिर भव्य वहां पे।
उत्सुक हैं नर-नारि सभी शुभ दर्शन हों अब नित्य यहां पे।
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पालन नित्य करें जग का अति अद्भुत भानु प्रताप तुम्हारा।
प्रातः रश्मि पड़ें वसुधा पर चेतन हो जन जीवन सारा।
जीव सभी निज कर्म करें फल पाकर चलता नित्य गुजारा।
पूजन भक्ति भरे मन से करते रवि कष्ट हरें बन एक सहारा।

= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा
 

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