प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

भाल भभूति मले मृग छाल बने शुभ वस्त्र तुम्हारे।
चन्द्र ललाट मनोहर है छवि देख हुए जन मोहित सारे।
अस्त्र त्रिशूल बड़ा प्रलयंकर दैत्य समेत निशाचर मारे।
घोर निनाद करे डमरू ध्वनि से असुरारि अनेक सँहारे।
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मारुति नंदन कष्ट निकंदन जीवन में खुशियाँ भर देना।
मानवता ग्रस ले यदि संकट दूर तभी उसको कर देना।
भक्त कुमार्ग चले जब भी तब बुद्धि विवेक पुनः भर देना।
विघ्नविनाशक हस्त सदा हर मस्तक पे प्रभु जी धर देना।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा

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