प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

कैलाशी के शुभ चरणों में, अपना ध्यान लगाता चल।
भाव हृदय के पूजन करके, शिव जी को दिखलाता चल।
भस्म दुग्ध दधि गंगाजल से, भक्तिपूर्ण होली खेलें।
आशीर्वाद मिले शंकर का, मन से यही मनाता चल।।
<>
पवन पुत्र मारुति बजरंगी, याद आपको करते हैं।
चालीसा अष्टक को जपकर, ध्यान आपका धरते हैं।
तैल पुष्प सिंदूर चढ़ाकर, मंगल शनि शृंगार करें।
कृपा सिंधु बजरंगबली सब, भक्तों के दुख हरते हैं।
<>
हे गणेश गौरी के नंदन, हर विघ्नों को हरियेगा।
बुद्धि विवेक न क्षीण कभी हो, कृपा आप यह करियेगा।
वंदन ध्यान करें हम प्रतिदिन, और आरती अर्पित हो।
खुशियों से भक्तों की झोली, नाथ दयानिधि भरियेगा।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा

Share this story