प्रवीण प्रभाती =  कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

गिरिजापति श्री महादेव जी, ध्यानमग्न नित रहते हैं।
बंद नेत्र से सकल सृष्टि का, अवलोकन प्रभु करते हैं।
शंकर जी भोले बाबा हैं, भक्तों के वश हो जाते।
सच्चे मन से जो तप करता, उनकी झोली भरते हैं।
<>
रामभक्त हनुमान महाबल, सेवा को तत्पर रहते।
प्रभु की इच्छा अनुमानित कर, कार्य सिद्धि उनकी करते।
मारुति सुत का नाम जपें जब, सारे संकट कट जाते।
जो ध्यावे बजरंगबली को, उनकी झोली भरते हैं।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा,

Share this story