प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी।।
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दिव्य दिवाकर और प्रभाकर पुण्य दिवस रविवार तुम्हारा।
लौकिक और अलौकिक जीवन में रहता उपकार तुम्हारा।
अर्घ्य प्रदान करे यदि मानव आप बनो तब तारण हारा।
छू न सके विपदा उसको करता नित नाम विचार तुम्हारा।
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हे शिव शंभु सदा हमरी विपदा भय से रक्षा करियेगा।
जूझ रहा जग है जिससे वह संकट भी सबके हरियेगा।
सम्मुख आज विपत्ति बड़ी प्रभु शक्ति असीम पुनः भरियेग।
नाथ कृपा करके कर आप सदा हर मष्तक पे धरियेगा।
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ग्यारहवें अवतार धरे हनुमान बने शिव शंभु पधारे।
भक्त करें जब याद प्रभू सबके सगरे नित काज सँवारे।
मंगल को बस मंगल हो हर भक्त सदा हनुमंत पुकारे।
छुद्र विषाणु विनाश करो जग रक्षक बन बजरंग हमारे।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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