प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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दिवस बजरंग का, मन में उमंग का,
भक्ति रस तरंग का, अहसास कीजिये।
पर्व यह मना रहे, ध्यान मन लगा रहे,
छवि हिय सदा रहे, आशीर्वाद दीजिये।
चालीसा का पाठ कर, हनुमान ध्यान धर,
राम नाम संग आप, जप कर लीजिये।
कृपा सदा बनी रहे, छत्रछाया तनी रहे,
भक्ति नित घनी रहे, कृपा रस पीजिये।
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सर्व विघ्न दूर करें, संकट भक्तों के हरें
गौरी सुत जीवन के, दुख हर लीजिये।
विघ्नहारी श्री गणेश, तात आपके महेश
भक्तों के सर्व कलेश, छूमंतर कीजिये।
गौरी के पूत आप, बड़ा अद्भुत  प्रताप
जग के संताप देख , प्रभु जी पसीजिये।
दान देते विद्या बुद्धि, मानस की करें शुद्धि
जगायें विवेक नित्य, भक्ति ज्ञान दीजिये।
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हरि की माया बड़ी है, भक्ति प्रेम की घड़ी है
दुखों को भगाना हो , हरि गुण गाइये।
मन से प्रभु नाम लें, धैर्य से बस काम लें
गोविंद उद्धार करें, शीश तो नवाईये।
विष्णु चक्रधारी नाम, याद करें आठों याम
वेदना सताए कभी, हरि को मनाइये।
शंख चक्र पद्म हाथ, दानवों का हो विनाश
जाना यदि हरि धाम, भक्ति मार्ग जाइये।।
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कष्ट सबके दूर हों, खुशियाँ भरपूर हों
अंबिका के ध्यान हेतु, कुछ पल दीजिये।
कार्य सबके सिद्ध हों, आप जग प्रसिद्ध हों
*सुख संपत्ति भी मिले, अंब ध्यान कीजिये।
राक्षसों को संहारतीं, कष्ट से वो उबारतीं
श्रद्धा की अँजुरी लगा, भक्ति रस पीजिये।
कामना की पूर्ति करें, धन धान्य घर भरें
भक्त हित जो सोचतीं, मातु नाम लीजिये।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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