प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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राम नाम है अनूप भूपतियों के हैं भूप,
सर्वश्रेष्ठ मानदंड बनाये श्री राम ने।
मानव जीवन जिये दीनन पे कृपा किये, 
चौदह वर्ष वन में बिताये श्री राम ने।
असुर संहार किया, भक्तन को सुख दिया,
मुनियों के संकट भी, मिटाये श्री राम ने।
सीता का हरण हुआ, रावण मरण हुआ
युद्ध कौशल जग को दिखाये श्री राम ने।
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आदित्य का दिन आज, पूर्ण करें सर्व काज,
बाधा सब दूर करें, भास्कर कृपा करें,
मार्तण्ड को पूज कर, बुद्धि होती है प्रखर।
रक्त चंदन पुष्प से, अर्घ्य दे पूजा करें।।
सप्त अश्व जुते हुए, रश्मि रथ चढ़े हुए,
प्रकाशवान हो धरा, तिमिर हरा करें।
प्रचंड तेज आपका, अतुलित प्रताप का,
विवस्वान को नमन, भोर में किया करें।
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शंभु त्रिपुरारी करें नंदी की सवारी नित,
जटाजूटधारी अंग भस्म को मला करें।
औघड़ सा वेश धरें कैलाश पे ध्यान करें,
तीन नेत्र संग चंद्र भाल पे कला करें।
सदाशिव भोले भाले ध्यान को लगाने वाले,
जो भी देते वरदान सदा ही फला करें।
दुष्टों के संहार हेतु रौद्र रूप धार शिव,
जगत पे आयी हर दूर वो बला करें।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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