प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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अंबिका दुखहारिणी, सर्व कष्ट निवारिणी,
भव सागर तारिणी, दुष्टों पे प्रहार हो।
मर्दन असुरों का करें, रोग-दुख ताप हरें,
बाधाओं के नाश हेतु, खड्ग-शूल वार हो।
व्याधियाँ सभी की टरें, झोलियाँ भंडार भरें,
जग में सबका सुखी, घर परिवार हो।
दुर्गा नव रूप धरें, दर्शन से लोग तरें,
मुख से आशीष झरें, भक्ति का संचार हो।
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जपें सिया राम नाम, हृदय से चारों याम,
आता यही सदा काम दिलवाता मुक्ति है।
सदियों से भजा करें, राम नाम रटा करें,
राम बाण के समान यही एक शक्ति है।
कोने कोने पूजे जाते, लोग राम गुण गाते,
राम की आराधना ही अनुपम भक्ति है।
मन बसें सिया राम, पूजन हो अविराम,
मोक्ष पाने की सरल, यही एक युक्ति है।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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