प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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दिन सूर्य का है आज पूर्ण करें सारे काज,
बाधाएँ हटाने वाले, भानु को प्रणाम है।
आदित्य को पूज कर, बुद्धि होती है प्रखर।
रोली चंदन पुष्प ले, नित्य ही प्रणाम है।
रोज चले रश्मि रथ  खींचे जिसे सप्त अश्व,
चराचर किया करें, पूजा अविराम है।
*तेज ऐसा है प्रखर, टिकती नहीं नजर *
नमन दिवाकर को, बड़ा शुभ काम है।
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शिव शम्भू बड़े भले, लिपटे नाग हैं गले,
कंठ में  गरल धारे, अभिषेक कीजिये।
चंदा भाल पर सोहे, जटाओं में गंगा मोहे,
मातु गौरी संग बैठें, सुधा रस पीजिये।
नंदी जी की है सवारी, जटा जूट भस्म धारी,
चर्म वस्त्र तन सजे, वरदान दीजिये।
नीलकंठ अविनाशी, कहलाते वे कैलाशी
शंभु परिवार का ही, नित्य नाम लीजिये।
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महाबली वायु पूत राम के बने हैं दूत,
शक्ति पे विश्वास कर, प्रीति को जगाइये।
लक्ष्मण के प्राण दाता राम से पुनीत नाता,
सिया के दुलारे की अलख जगाइये।
लीला अपरंपार है बुद्धि-बल अपार है
राम को मनाने हेतु भक्त को मनाइये।
नाम जपे कष्ट मिटें मानव के पाप कटें
करना  प्रसन्न इन्हें लड्डू तो चढ़ाइये।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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