प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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शैलसुता व महेश, पुत्र आपके गणेश,
कार्तिक संग परिवार को नमन करें।
कार्य न विचित्र करें मन को पवित्र करें,
आदतें बुरी जो पड़ीं सारी शमन करें।
वातावरण शुद्धि और विद्या व बुद्धि हेतु,
परिवार संग बैठ लोग हवन करें।
शंभु पे भरोसा रख ॐ नमः शिवाय जप,
मन की बुराइयों का रोज दहन करें।
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दशानन हर लाया राम का वियोग पाया,
सीता जी को खोज पाये वीर हनुमान जी,
रघुवर से जुड़ा नाता लखन के प्राणदाता
संजीवनी लेके आये  वीर हनुमान जी।

अहिरावण संहारा सैनिकों को भी मारा,
दोनों भ्राता छुड़ा लाये वीर हनुमान जी।
भरत का बचे जीवन त्यागें नहीं निज तन,
राम पाती पहुंचाये वीर हनुमान जी।
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नाग का जनेऊ डाले गणपति भोलेभाले,
कार्तिक के भ्राता नित मूष सवारी करें।
बुद्धि के प्रदायक हो जाती सुखदायक हो,
हे गणनायक हम पूजा तिहारी करें।
विपदाएँ दूर करें विघ्न सारे चूर करें,
रक्षा संकटों से प्रभु आप हमारी करें।
झपटे हैं नित नाम आप बनाते काम,
देवा दे के वर ये जीवन सुखारी करें।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव,
 

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