प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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दिन आता इतवार लोग होते बेकरार,
छुट्टी के इस दिन को चैन से मना सकें।
कोरोना ने तोड़ा भ्रम घर बैठे होता श्रम,
लॉक डाउन होने से बाहर न जा सकें।
कब दिन शुरू हुआ कैसे ये खत्म हुआ,
छुट्टी के पुराने दिन लौट के न आ सकें।
दिन भर लैपटॉप वो छूटे तो फोन हाथ,
वर्क फ्रॉम होम से पीछा न छुड़ा सकें।
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आदित्य का दिन आज, पूर्ण करें सर्व काज,
बाधा सब दूर करें, भास्कर कृपा करें,
मार्तण्ड को पूज कर, बुद्धि होती है प्रखर।
रक्त चंदन पुष्प से, अर्घ्य दे पूजा करें।।
सप्त अश्व जुते हुए, रश्मि रथ चढ़े हुए
प्रकाशवान हो धरा, तिमिर हरा करें।
प्रचंड तेज आपका, अतुलित प्रताप का
विवस्वान को नमन, भोर में किया करें।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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