प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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शांत और सौम्य मुख देख जिसे भागें दुख,
भाल नयनाभिराम परम् विशाल है।
सोहतें हैं तीन नेत्र पूजते हैं सदा भक्त,
कभी नहीं क्षीण होती कीर्ति तरु तमाल है।
आभूषण बिच्छू सर्प हरते सभी के दर्प,
अंग भस्म सदा सोहे वस्त्र चर्म छाल है।
भक्तों को अभय देते दुष्ट प्राण हर लेते,
सदाशिव का त्रिशूल काल सम कराल है।
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बलवान लाल देह करते भक्तों से नेह,
संकट में जो भी पड़े मारुति उबारते।
ज्ञानवान धैर्यवान गुणवान शक्तिवान,
दौड़ें-दौड़े आते भक्त जब भी पुकारते।
बड़े-बड़े काम किये राम प्रीति हिय लिये,
बोल भक्ति भरे बोल जीवन सँवारते।
वो अनाथ के हैं तात रक्षा करें दिन रात,
मन में जो बस गया उसे न बिसारते।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव

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