प्रवीण प्रभाती = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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बोल हरि हरि बोल अंतस के पट खोल,
मन के विकार सर्व हरिहर ही हरें।
दिल में जो शुद्घ भाव शुभ करता प्रभाव,
जगदीश्वर का तेज निज मन में भरें।
बालक ध्रुव प्रहलाद हरि को कर याद,
पाकर हरि कृपा जीवन सफल करें।
सारे भ्रम दूर कर शेषशायी पूज कर,
उर का भक्ति कलश शुभ भावों से भरें।
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हे गणनायक बुद्धि प्रदायक ज्ञान ह्रदय में भर देना।
विघ्नविनाशक जीवन से सब विघ्ननिवारण कर देना।
नाथ गजानन मन चाही खुशियों से जीवन भर देना।
मंगलमूरति हाथ कृपा का हर मस्तक पर धर देना।।
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हरिहर को अंतस बसा, जपें नित्य प्रभु नाम।
जगदीश्वर की हो कृपा, बने सभी के काम।
चक्रपाणि का नाम ही, बना जगत आधार।
श्री हरि के हर भक्त का, होता बेड़ा पार।।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव
 

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