रे कान्हा = अनुराधा सिंह

रे कान्हा = अनुराधा सिंह

रे कान्हा........
मारे पिचकारी से,
बड़ी होशियारी से,
रे कान्हा छुप छुप के..........
ब्रज आई है राधा,
छिपते- छिपाते,
देर हुई है कान्हा,
मुझे आते-आते,
रूठ मत हरजाई रे,
क्यूं सताए मुझे रूठ के.........
रे कान्हा.........
होली मुझे बड़ी भाए,
ले, ले राधा तू रंग,
रंग जा प्रीत के रंग,
भींगे है मोरा अंग-अंग,
बड़ी होशियारी से,
क्यूं डाले हैं रंग छुप छुप के.....
रे कान्हा........
ये तूने क्या पिलाया,
झूम उठी मैं मतवाली,
पिलाया जो मोहे भांग,
हो गई मैं तेरी दिवानी,
क्यूं सताए रे मोहे
छलिया छल- छल के....
रे कान्हा.........
= अनुराधा सिंह 'अनु' रांची, झारखंड.

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