स्त्री होने का अधिकार = रुबी गुप्ता

स्त्री होने का अधिकार = रुबी गुप्ता

चाहिए महिला दिवस पर एक उपहार,
महिलाओ को मिले हर माह विशेषाधिकार|

हाँ मै  दुनिया की आधी आबादी हूँ,
आपकी  अदालत मे  आज एक वादी हूँ| 
आज माँगती हूँ न्याय,
उम्मीद हैं आप नही करेगे अन्याय|
मै जननी हूँ, मै  सशक्त आकृति हूँ,
मै जीवन दायिनी सुन्दर प्रकृति हूँ|
आज  माँगती हूँ स्त्री होने का हक,
जहाँ नही है ,मेरे दोषी होने  पर शक|
हर माह एक  दर्द मुझसे खेलती है,
लेकिन स्त्री उसे  शर्म और संकोच से झेलती है|
चाहती हूँ उन दिवस मे थोडा आराम,
बहुत कठिन होता है तब घर बाहर का काम|
रक्त रंजित  तन मन और  दर्द अथाह  होता है,
तब स्त्री होने का दर्द बेपनाह होता है|
क्या  मुझे दे सकते हैं एक उपहार विशेष|
जो बन सके अधिकार  हमारा , 
जो है आज स्त्रीत्व अशेष|
अब आप दीजिए, 
हमे उस दर्द मे सहारा ।
दीजिए स्त्री होने का अधिकार हमारा | 
स्त्री होने का अधिकार हमारा|
= रुबी गुप्ता, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
 

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