सीमा -  मधु शुक्ला 

pic

सीमा अपनी हम पहचानें, यदि सामाजिक जीवन में,
भाई चारा बना रहे तब, मैल नहीं आये मन में।

दखल बेवजह देते रहना, आदत ठीक नहीं होती,
कतराने लगते हैं संगी, भेद पड़े अपनेपन में।

स्नेह हमारा मिले सभी को, सोच बड़ी अच्छी लगती,
कहीं - कहीं पर पर्दादारी, सही लगे हर आँगन में।

सदाचार देता है खुशियाँ, नहीं विवादित पल आते,
कटे चैन से जीवन सारा, ओज दमकता आनन में।

राय मशविरा चलते रहते, भाग हमें लेना पड़ता,
परामर्श बिन माँगे देना, मान घटाता है जन में।
- मधु शुक्ला, आकाश गंगा नगर, सतना , मध्यप्रदेश .
 

Share this story