शारदीय नवरात्र - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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पूजें करद्वय जोड़ के, मातु स्कंद को लोग।
नौ दिन तक जप तप करें, नित्य लगायें भोग।
नित्य लगायें भोग, भक्ति में निज मन धरते।
मिट जाते सब रोग, और सब संकट कटते।
करें कामना पूर्ति, नित्य जयकारे गूँजें।
ममता की प्रतिमूर्ति, हृदय से सारे पूजें।।
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छठवाँ दिन कात्यायनी, बृजमण्डल की शान।
अधिष्टात्रि सम्मुख नमन, भक्त करें गुणगान।
भक्त करें गुणगान, गोपियाँ तुमको भजतीं।
हृदय बसें घनश्याम, चाहना मन में रखतीं।
मन में सोचें तात, जियें कैसे ममता बिन।
मात्र सत्य यह बात, बड़ा शुभ है छठवाँ दिन।
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ज्वालामय हर स्वाँस है, करें असुर भयभीत।
कालरात्रि ममता भरीं, सबके लें दिल जीत।
सबके लें दिल जीत, भक्त सब पूजा करते।
भागें दैत्य सभीत, मातु सम्मुख न ठहरते।
दिवस सातवें लोग, पुकारें हे ममतामय।
भक्त लगाते भोग, शांत होतीं ज्वालामय।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव,

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