कुछ इस तरह = राजीव डोगरा

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हम बिखरगे 
कुछ इस तरह 
कि तुम संभाल भी न पाओगे।
हम टूटेंगे 
कुछ इस तरह 
तुम जोड़ भी न पाओगे।
हम लिखेंगे 
कुछ इस तरह
कि तुम समझ भी न पाओगे।
हम सुनाएंगे दास्तां
कुछ इस तरह
कि तुम कुछ कह कर भी 
न कह पाओगे।
हम जाएंगे इस जहां से 
कुछ इस तरह 
कि तुम्हारे बुलाने पर भी
कभी लौटकर न आएंगे।
= राजीव डोगरा 'विमल'
 ठाकुरद्वारा, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

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