गीत = अनिरुद्ध कुमार

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फूल आज पूछे है बोलो, क्यों उदास है माली।
बागो मे छाई हरियाली, कहाँ गई खुशहाली।।
         कहाँ गया वो जीवन दर्शन,
         सुंदरता का वह आकर्षण, 
         मदमाते नैनों का काजल,
         प्रेम पेंग पर दिल का अर्पण।
मनमोहक वो प्यारे नखरे, तीती मीठी गाली।
बागो मे छाई हरियाली, कहाँ गई खुशहाली।।
         सूना सूना कैसा मंजर,
         राहों में उग आये खंजर,
         बौराए सब बाग बगीचे,
         जाने क्यों सब लागे बंजर।
प्यार गली वीरान पड़ी है, ना सीटी ना ताली।
बागों मे छाई हरियाली, कहाँ गई खुशहाली।
          यारों की वो राम कहानी,
          हँसी ठिठोली सुर मस्तानी,
          मधुर मिलन की फाकामस्ती,
          बात बात में तानातानी।
चारो तरफ उदासी घेरे, अवसादों की जाली।
बागो मे छाई हरियाली, कहाँ गई खुशहाली।
          अबना कोई काग उचारे,
          मंदिर के सुनसान नजारे,
          कोई ना अब आये जाये,
          संबंधों में पड़ी दरारें। 
हर सूरत की रौनक फीकी, गायब है मुख लाली।
बागो मे छाई हरियाली, कहाँ गई खुशहाली।
= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

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