गीत = अनिरुद्ध कुमार

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लहराती है हरियाली सखी, झूमे ताड़ तमाल।
धानी रंग निहाल करे सखी, गल बैजंती माल।।

प्रेम सुधा चित पान करे सखी, नाचें ठोके ताल।
प्रीत बदन में मचले हे सखी, यौवन जी जंजाल।
फूल कली मनभावन ये सखी, भ्रमर बजावे गाल।
प्यार बिना तन माटी हे सखी, मन रहता बेहाल।।
धानी रंग........   
बारिश बैरन तड़पाये सखी, सुनले दिल का हाल।
घन गरजे व्याकुलता हे सखी, आँसू ढ़लके गाल।।
बरखा रिमझिम बरसे हे सखी, धरती मालामाल।
झिंगुर मेढ़क तंज कसे सखी, कहतें है कंगाल।।
धानी रंग........
ये जीना भी क्या जीना सखी, जामें सुर ना ताल।
पग बहके तन डोले हे सखी, उल्टी सीधी चाल।।
अब तो कोई जतन बता सखी, बीते सुखमय साल।
धरती सा सज इतरायें सखी, जीवन हो खुशहाल।।
धानी रंग........
= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।
 

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