गीत = अनिरुद्ध कुमार

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यह  भोर  सुहानी  है, धरती  बलखाई  है।
रिमझिम बरसातों में, झिरझिर पुरवाई है।।

शबनम की लड़ियों में, पैगाम मुहब्बत का।
गुलजार  बहारों  में, दुख दर्द  मिटे दिल का।
झकझोर उजाला  है, विहसित तरुणाई है।
रिमझिम बरसातों  में, झिरझिर पुरवाई है।।

कलियाँ  हर  जलवों  में, रंगीन  हँसी लाई।
दिल झूम कहे देखो,क्या खुशी उमड़ आई।
रजनी की  खुशबू  में, मादकता  छाई  है।
रिमझिम बरसातों में, झिरझिर पुरवाई है।।

हवा  के  थपेड़ों  में, विहसित  है अमराई। 
खेतों, खलिहानों में, खुशियाँ फिर से छाई।
कजरी  के  लहरा  में, गोरी  शरमाई  है।
रिमझिम बरसातों में, झिरझिर पुरवाई है।।

मौसमी  नजारों  में, जीवन  की  गहराई।
दिन रात  झमेलों  में, दिखती  है परछाई।
सुख दुख  के मेलों में, कितनी सच्चाई है।
रिमझिम बरसातों में, झिरझिर पुरवाई है।।
= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।
 

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