गीत  -  अनिरुद्ध कुमार               

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आज धरा पर धूम मची, कान्हा से अनुराग जगी।
कृष्ण-कृष्ण रटते प्राणी, हरि लीला कितनी प्यारी।
             जय बोलें नन्दलाल की,
             नटखट लाल गोपाल की।
             बाल क्रिड़ा मन हर लेवे,
             यशोदा माँ के लाल की।
जय जय कृष्णा बोल रहे, हाथों में लेकर बंसी।
कृष्ण-कृष्ण रटते प्राणी, हरि लीला कितनी प्यारी।।
             राधा के कृष्ण मुरारी,
             पूज रहे सब नर-नारी।
             अंग-अंग भाव तरंगित,
             कृष्ण भक्ति दुनिया रंगी।
बाल ग्वाल के रँग रंगे, धूम धमाल दही हंडी।
कृष्ण-कृष्ण रटते प्राणी, हरि लीला कितनी प्यारी।।
              माखन चोरों की टोली, 
              फोड़ रहे देखो मटकी।
              सर शोभे है मोर मुकुट,
              माखन मुखपे है लिपटी।
लोग मगन मन रास करें, सुधबुध हारें है तन की।
कृष्ण-कृष्ण रटते प्राणी, हरि लीला कितनी प्यारी।।
               कृष्णा राधा की लीला,
               सबको लगती मनुहारी।
               राधा के मुरली धारी,
               लोग बुलाये बनवारी।
गाँव गली बाजे मुरली, मस्त मगन हैं नर नारी।
कृष्ण-कृष्ण रटते प्राणी, हरि लीला कितनी प्यारी।।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

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