गीत = जागृति

गीत = जागृति

जीवन की इस रजनी में,
तुम बनकर आए प्राण प्रिये,
तुम थोड़ा सा चंचल हो, 
मैं थोड़ा नादान प्रिये।
सुख - दुख की इस दोपहरी में,
तुम बनकर आए छांव प्रिये,
तुम थोड़ा सा हंसते हो,
मैं थोड़ा नाराज प्रिये।
सूनी सी इन आंखों में, 
तुम बनकर आए ख़्वाब प्रिये,
तुम थोड़ा सा व्याकुल हो,
मैं थोड़ा ख़ामोश प्रिये।
बैठती हूं अकेले में जब,
तुम बनकर आते याद प्रिये,
तुम  थोड़े  से अंजान हो, 
मैं थोड़ा बेचैन प्रिये।
= जागृति ,प्रयागराज , उत्तर प्रदेश

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