गीत = पूनम शर्मा स्नेहिल

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मुस्का रहे हैं लब ये, फिर आंख नम सी क्यों है ।
तेरे बगैर धड़कन,ना जाने कम सी क्यों है ।

तू है मेरा सहारा , मुझको यही भरम है,
तुझसे बिछड़ के रोना क्यों कर मेरा करम है, 
यदि भूल हम गए हैं तो मीठा दर्द क्यों है,
तेरे बगैर धड़कन,ना जाने कम सी क्यों है ।

लगता है मानो अब तो, सांसे रहीं ये थम हैं,
खुल जाय राज फिर ना इस कसमकश में हम हैं,
संबंध यदि ख़त्म हैं तो याद आई क्यों है,
तेरे बगैर धड़कन, ना जाने कम सी क्यों है ।

शिकवा न कोई तुमसे, ना ही गिला सनम है, 
मिलता है हमको वह सब जो भी लिखा करम है,
यदि भाग्य में नहीं तो करता प्रयत्न क्यों है,
तेरे बगैर धड़कन, ना जाने कम सी क्यों है ।
®️पूनम शर्मा स्नेहिल, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
 

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