रोला छन्द में बसंत = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

रोला छन्द में बसंत = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

सुरभित आज बसंत, फूल अरु भँवरे झूमें।
खुशियाँ मिलीं अनंत, हुलस तरुवर पग चूमें।।
मौसम के अनुकूल, सजाते उपवन माली।
अवलोकन के हेतु, लोग वन-उपवन घूमें।।1

पवन बहे अति मंद, सभी के मन को भाए।
पीने को मकरंद, भृमर दल लेकर आए।।
टेसू और पलाश, ख़िलातें हैं वनमाली।
रंग-बिरंगे फूल, हृदय को बहुत सुहाए।।2

रास-रंग के गान, सुनाती प्रकृति सुहानी।
मन होता बरजोर, प्रीति की रस्म निभानी।
स्वर्ण रश्मियाँ नर्म, बिखेरें मरीचिमाली।
बासंती ऋतु राग, छोड़ता अमिट निशानी।।3
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, 12/4/21
 

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