एकता में शक्ति = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

pic

गुपचुप गुपचुप बातें करतीं, अपनी बतख सहेली से।
इनके ये संबंध सभी को, लगते एक पहेली से।।1

बत्तख दीदी बोले इनसे, खाने को कुछ लाओ।
मैं भी कुछ दाने लाई हूँ, सभी बाँट कर खाओ।।2

एक पते की बात बताऊँ, सदा ध्यान में रखना।
मानव दाने डाले उससे, हरदम बचकर रहना।।3

इंसानों  की खबर सुनाऊँ, उसका पेट न भरता।
कैसे किसको पकड़ूँ खाऊँ, यही सोचता रहता।।4

नदी-ताल के हाल सुनाओ, क्या कोई है खतरा।
कई दिनों से झुंड हमारा, नहीं झील में उतरा।।5

वो सब बोलीं इस पानी, मकर छिपा है भारी।
उससे अब रक्षा करने की, हम लें जिम्मेदारी।।6

यहाँ लालची इंसानों से, हमको सदा बचाना।
पेट हमारा भरने खातिर, दाने लेकर आना।।7
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव
 

Share this story