सूफीयाना संगीत खुदा से रू-ब-रू कराता है : गायक प्रेम सिंह

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utkarshexpress.com । देहरादून। विनोद निराश। देहरादून की हर दिल अजीज, मशहूर-औ-मारूफ  साहित्यकार, कवयित्री एवं गुलुकारा श्रीमती झरना माथुर  के पेज "कुछ पँक्तियाँ " के तहत "एक मुलाकात "प्रोग्राम के आज के खाश-औ-आम मेहमान कलाकार प्रेम सिंह ने उनके उनके द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिरकत कर रौनक बढ़ा दी। प्रेम सिंह एक सूफी गायक का हुनर रखने के साथ - साथ फ्यूजन सिंगर भी है। ये राजस्थान के श्री गंगानगर के रहने वाले है। आपको बचपन से ही संगीत का शौक था। आपने पड़ाई के साथ-साथ गुरुमत संगीत की शिक्षा ली। आपने संगीत की शिक्षा दिल्ली से उस्ताद श्री मिथलेश और मिहिर से हाँसिल की । साथ ही ये भी कहना मुनहसिब होगा कि आपने स्टेज शो भी करने शुरु कर दिये है। 
आपका क्रियान के नाम से एक बैड भी है। जो पंजाब और राजस्थान मे बहुत ही लोकप्रिय है। आप जयपुर, मुम्बई, चेन्नई, कोलकता जैसी मशहूर जगहों पर  शो भी कर चुके है। आजकल आप लोगों को मुफ्त में संगीत की तालीम दे रहे है। आपको सूफीयाना संगीत से बेइंतेहा मुहब्बत है। इसे आप रूह का संगीत भी कहते है। जिसमें प्रभु से मिलने की आस होती है, या यूं कहिये कि सूफीयाना संगीत खुदा से रू-ब-रू कराता है । आपने प्रोग्राम में " छाप तिलक " सूफी गीत सुनाकर सबका मन मोह लिया। आपने राग भीमपलासी की बन्दिश (जा रे अपने मन्दीरवा जा) से समा को बेहद खूबसूरत बना दिया।
आपके सँगीत में लोगो को मुग्ध करने की अद्भुभुत शक्ति है। "नैना ठग लेंगे"  फ़ियुजन गाकर नई पीढ़ी के लिए एक नयी मिसाल पेश की है। झरना माथुर ने कार्यक्रम के अंत में प्रेम सिंह को कहा कि मंच आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है। वह अपने जीवन में उचाईयों को छूकर अपने देश का नाम रोशन करे।

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