ता थै तक थै..(कटाक्ष) - सुमी लोहानी 

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आजकल नेपाली लोगों को बहुत ज्यादा महसूस हो रहा है । सचमुच ऐसे महान, बलिहारी, दूरदर्शी नेताओं के पास देश के निवासियों के पास उच्च सत्य न हो तो कौन होगा?
स्वच्छता हो या तिलचट्टा। कौन रणकर नारंथना का। कौन नेपाल का ? ये राजनीति भी कमाल की है ! शायद कुछ समझ कर ही इसका अनुसरण कर रहे हैं । सैकड़ों लोगों ने इसका अनुसरण किया होगा जैसा कि वे समझते थे । हजारों लोग आंख मूंदकर सामने के पीछे भाग रहे हैं, कह रहे हैं ' समझ नहीं आता किस जाति की पूजा की जाए ' । कुछ लोग अपने ख्वाामित को खुश करके ' मौके में चौका मारने ' वाले हैं । अन्यथा ओलंपिक मैराथन खेल सत्ता की कुर्सी तक क्यों पहुंचता रहा? शायद ब्राह्मणों की जाति मशरूम खाए या स्वाद जान ले! मशरूम खाया और स्वाद पता चला । लेकिन राजनीति के 'र' का उच्चारण करने के साथ ही मुंह का स्वाद बदल गया । वाह ! वाह ! कितना कड़वा है, ट्र्रो उतना ही मीठा आता है जितना गलगड की दवा । और तुम क्या जानो मेरे जैसे तूफानों का स्वाद ! शायद इसीलिए रंगीन चश्मा पहनने वाले और एक ही बात अलग होती है । ऐसा अंतर देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे । सचमुच, सत्ता का ऐसा रंगीन चश्मा पहनने के बाद मैं सर्वगुण संपन्न हूँ, बिल्कुल ब्यूटी पार्लर की तरह, सुंदर और बाकी सब ब्यूटी पार्लर से फूट्रुक की तरह है । क्या सच में राजनीति के रंगीन चश्मे, काला से सफेद, सफेद से काला , और अच्छा से बुरा या जो दिखता है, वो ही दिखता है । कितना अच्छा होगा सभी के दु:ख, अभाव आदि को देखकर । चश्मे में ऐसी जिनमासीना चीजें ना दिखे तो क्या करें किसके बाप का क्या ख्याल है और जो राजनीति में नहीं हैं उन्हें केवल वही दिखाई क्यों नहीं देता जैसे सावन में 'आंख फोड़े बैल', काला से सफेद ! जिन्हें राजनीति की 'र' तक नहीं आती, वो कूटनीति की कुटिलता क्या जाने, बेचारे !
हो गया, कुछ भी हो गया, चलो बोलें, लेकिन राजनीति के साथ बैल को बेचने की निशानी भी न हो, लेकिन हर चीज में प्यार और पीछा करने में मजा ही आता है। और आम लोग धोती, टोपी पहनकर 'गो फर्स्ट' कहकर खुशी से भाग रहे हैं । जैसे हवा हर तरफ फैली हुई है और हर किसी को ऐसा महसूस करा रही है, राजनीति का बलात्कार हर किसी को गर्मियों की ठंडी ' लू ' की तरह महसूस करा रहा है और हर कोई ' ताई तक थाई ' की झील में चैन की सांस ले रहा है ।
चलो बाकी बाद में करते हैं, है ना? चलो अभी झील में ताला बनाते हैं! ' ता थाई थाई थाई.. थाई...!
सुमी लोहानी, काठमांडू , नेपाल

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