बता दो भूल मेरी, दोष मेरा ? - अनुराधा पाण्डेय

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इंगितों में ही बता दो ।
भूल मेरी, दोष मेरा ?

दण्ड फिर जो भी बताओ,
हर्ष से स्वीकार मुझको ।
चींख कर बोलूँ करे मन,
प्राण ! तुमसे प्यार मुझको ।
पर तुम्हारा मौन बरबस,
छीन लेता होश मेरा ।
भूल मेरी, दोष मेरा ।

बोल दो तुम तो प्रलय तक,
मग्न मन मनुहार कर लूं ।
तुम मुझे कह दो तनिक यदि,
जा विजन में मौन झर लूँ।
किन्तु स्वर कुछ भी न मिलता----
है यही अफ़सोस मेरा ।
भूल मेरी, दोष मेरा..?

डांट दो या प्रेम दो तुम ,
शुभ लगे मुझको उभय ही ।
किन्तु जब तुम मौन होती,
टूटने लगता हृदय ही ।
बस तुम्हारा एक स्वर भी---
है मधुर परितोष मेरा ।
इंगितों में ही बता दो ,
भूल मेरी,दोष मेरा..?
- अनुराधा पाण्डेय , द्वारिका , दिल्ली
 

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