वो सुबह = ओनिका  सेतिया 

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वो सुबह कभी तो आयेगी ,
जब गम की काली रात ,
सदा के लिए मिट जायेगी ।
जब सुबह सूरज की रोशनी ,
कण कण में जीवन का संचार करेगी ।
जब प्रकृति अपने पूरा श्रृंगार ,
कर झूमेगी , इतरायेगी ।
जब मदमस्त पवन अपनी तरंग में,
लहराएगी हजारों फूलों की खुशबू लिए ।
जब सुबह की सैर को हम निकला 
करेंगे और फूलों से बातें करेंगे।
उपवन में जाकर उन्हें चूमेंगे , निहारेंगें।
जब हम सुबह की दिनचर्या ,
प्रफुल्लित मन से प्रारंभ करेंगे ।
दफ्तर वाले दफ्तरों में , दुकानदार अपनी 
दुकानों में अपना कार्य शुरू करेंगे ।
जब विद्यार्थी अपने स्कूल / कॉलेज निर्भय 
होकर जायेंगे। 
हर वो व्यक्ति जिसने अपनी जीवन रूपी 
नैया को लगा दिया था किनारे,
हर वो व्यक्ति जो अपने सपनो ,अभिलाषाओं को 
भूल बैठा था । 
जीवन मरण का सवाल अब अपना, 
विकराल रूप धारण ना कर सकेगा।
कभी तो अंत होगा इस महामारी का !
कभी तो वो शुभ दिन आयेगा !
खुशियों से भरी, आनंद में डूबी ,
निःशंका , निष्कंटक 
वो सुबह कभी तो आयेगी ।
= ओनिका  सेतिया,  फरीदाबाद, हरियाणा

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