नवरात्रि में जौ बोने का कारण और जौ के उगने से मिलने वाले संकेत - झरना माथुर 

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नवरात्रि में माता की आराधना के क्रम में कलश स्थापना करते समय, पूजा स्थल पर ज्वारे (जौ) इसलिए बोये जाते हैं, क्योंकि हिन्दू धर्म ग्रंथों में सृष्टि की शुरूआत के बाद पहली फसल जौ ही मानी गयी है। इसलिए जब भी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, तो हवन में जौ अर्पित किये जाते हैं।

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ज्वारे आपको भविष्य में आने वाले संकेतों के बारे में जानकारी देते हैं। मान्यता के अनुसार अगर बोये गए जौ नवरात्रि के शुरुआत के तीन दिनों में ही अंकुरित होने लगते हैं तो ये शुभ संकेत होता है।लेकिन अगर यह बिल्कुल उगे ही नहीं तो भविष्य के लिए यह अच्छा नहीं माना जाता है। इसका अर्थ ये लगाया जाता है कि कड़ी मेहनत के बाद भी आपको मेहनत का फल नहीं मिलेगा। वहीं यदि आपका बोया हुआ जौ सफेद या हरे रंग में उग रहा है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है।
    माना जाता है कि हिन्दू धर्म एक वैज्ञानिक धर्म है ।इससे जुड़े रीति- रिवाजों के पीछे कोई वैज्ञानिक तथ्य छुपा होता है जो मानव जीवन के लिये बहुत उपयोगी होता है।  जौ एक तो पहली फसल होने के कारण पूजा में चढ़ाई जाती है और अगर स्वस्थ्य की नज़र से देखा जाये तो ये बहुत ही उपयोगी होती है।
    ज्वारे में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, सेलेनियम, जिंक, कॉपर, प्रोटीन, अमीनो एसिड, डायट्री फाइबर्स और कई तरह के एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. जौ एक बहुत ही फायदेमंद अनाज है. आप चाहे तो इसे अपने रोज के आहार में शामिल कर सकते हैं या फिर एक औषधि के रूप में भी ले सकते हैं।
-  झरना माथुर, देहरादून (उत्तराखण्ड)
 

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