बाकी है अभी = शारदा जेतली

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वास्ता रे खुदा तेरे करार का जो किया था,
सभी कुछ लुट गया तेरा ऐतबार बाकी है अभी।

प्यार भरे लम्हें जो सजाये थे उर में,
रीता हो गया दिल का खजाना अपना।
न रहा दिल न दिले-बहार अब तो,
सिर्फ दिल की बेकरारी बाकी है अभी !

पलकों को उठा के देखू तो सिर्फ,
नज़र आता है तेरा ही नूर अब तो !
नूरे-मौहब्बत मिट चुकी है चाहें जहां से,
दिल की गहराइयों में सरूर बाकी है अभी।

नजराना पेश करें तो क्या करें हम,
तेरी महफिल तो सजी है बहारों से।
नहीं रहा मेरे पास तेरे लिए कुछ भी,
सिर्फ आंखों में अश्क बाकी है अभी।

खफा न हो जाना ओ बेवफा हम से,
हमने तो कसम खायी है न मिलने की तुझे।
बसा के जहां अपना ठुकरा दिया है हमें,
फिर भी क्यों तेरा इन्तजार बाकी है अभी।
= शारदा जेतली, जयपुर,  राजस्थान
 

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