हालात = झरना माथुर

हालात = झरना माथुर

सासो पे लगा है मौत का पहरा,
धरती पर तड़प रहा है इन्सान।

हर मज़हब ,वर्ग कर रहा है दुआ,
बक्श दे मौला अब तू जान।

अर्थव्यवस्था कर रही है तांडव,
हर व्यक्ति होता जा रहा बेजान।

अभी भी नेताओं का शोर है,
सियासत से जनता है नादान।

ना सोचा था ऐसा होगा मंजर,
भगवान ये कैसा तेरा विधान।
= झरना माथुर, देहरादून
 

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