दौरे-मुश्किल = झरना माथुर

दौरे-मुश्किल = झरना माथुर

माना दौरे-मुश्किल से गुज़र रही है जिन्दगी,
अभी भी ज़िन्दगी जीने का जज़्बा बाकी है।

सूरज ने निकलना नही छोड़ा धूप आ रही है,
आज आशाओं की किरणों को खिलना बाकी है।

फिजा मे पवन बह रही है यूँ मद-मस्त होकर ,
इस हवा में खुशियों की खुश्बू घुलना बाकी है।

बाग - बगीचों मे कलियों से फूल बन रहे है,
दिलों में उम्मीदों का कमल खिलना बाकी है।

कुछ जिन्दगी की जंग जीत रहे,कुछ हार रहे,
मगर ए दोस्त डरना नही, डर हरना बाकी है।

दूरियों ने नजदीकियो पर लगा दिये है पहरे,
कुछ पल ठहर  महफिलो का सजना बाकी है।

हर तरफ डर और दहशत का माहौल बना है,
अरे खौफ से निकल तू, अब हँसना बाकी है।
= झरना माथुर, देहरादून
 

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