चारों तरफ मातम = सुनीता मिश्रा

चारों तरफ मातम = सुनीता मिश्रा

मंजर ऐसा गुजर रहा ....
चारों तरफ है मातम छाया ...
हुआ क्या हमसे ऐसी गलती जो... 
जिंदगी ने हमसे दामन छुड़ाया...
सोचा ना था ऐसा भी युग आएगा... 
हम रिश्तेदारों से दूर भाग रहे है... 
कयामत ने ही हमें दूर भगाया...
काम के लिए हम घर छोड़ दूर भाग जाते थे... 
आज देखो यह कैसा मंजर काम छोड़ हम घर है बैठे ...
पेड़ों का खात्मा कर हमने ऑक्सीजन हटाया ...
आज उसी ऑक्सीजन के लिए हमने है पैसा बहाया ...
पर फिर भी नसीब नहीं हो रहा जिंदगी...
आज पैसा किसी के भी काम न आया... 
रिश्ते नाते भी दूर हुए ...
मरने पर कफन भी ओढा़ने कोई ना आया..
माहौल ऐसा है चारो तरफ...
गम क्या खुशियों मे भी कोई न मिलने आया...
✍️सुनीता मिश्रा, जमशेदपुर

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