क्या कमी है = अनिरुद्ध कुमार 

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खूबसूरत जिंदगी है, प्यार समझो बंदगी है,
होगया मौसम सुहाना, देखके आशा जगी है। 
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भोर में लाली हँसी है, हर तरफ छाई खुशी है,
मस्त फूलों का तराना, खूबसूरत दिलनशीं है।
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क्या फिजा का रंग उभरा, हर निगाहें घूमती है,
देख मस्ती में जमाना, मन मयूरी झूमती है।
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चाँदनी में रौशनी है, ठंढ़ की चादर तनी है,
झिलमिलाये चाँद तारें, अप्सरा सी नाजनी है।
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व्योम में बदली घनी है, बात अब लगती बनीं है,
व्यग्र देखे सरजमीं को, आज तो महफिल धनी है।
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बोल मीठे रस सनी है, अब नहीं ताना तनी है,
सुन बहारों का तराना, बैठ के देखी सुनी है।
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भूल जा जो भी हुआ है, सोंचले तू आदमी है,
दे दिया सब कुछ खुदा ने, पास तेरे क्या कमी है।
=  अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद झारखंड।

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