शब्द - अनिरुद्ध कुमार

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शब्द नहीं तो कुछ नहीं, बात पते की मान।
कृतिमान यह शब्द गढ़े, शब्द बने पहचान।।

शब्द-शब्द को जोड़ के, लिखता रचनाकार।
अभिव्यक्ति को बल मिले, ज्ञान का हो प्रसार।।

गागर में सागर भरे, शब्द-शब्द में जोर।
इस नश्वर संसार को, देत शब्द झकझोर।।

शब्द बहुत हीं कीमती, जाने है गुणवान।
शब्दों की महिमा करें, होठों पर गुनगान।।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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