मंजिल को यूं भी पाना होगा = अनुराधा सिंह 

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अपनी मंजिल को यूं भी पाना होगा,
अपने आंसू पोंछ के मुस्काना होगा।।

सौदा न कर लाशों का इस आपदा में,
मुंह ईश्वर को तुझको दिखलाना होगा।।

सूखे होंठों पर फ़रियादें  मचलेंगी,
अश्कों से लबरेज़ वो पैमाना होगा।।

जिसकी लूट गयी दुनिया बस वो ही जाने,
सब्र से अपने दिल को समझाना होगा।।

उससे मिलकर उसका दुःख हल्का कर दूं,
उसका सर होगा, मेरा शाना होगा ।।

उसने दिया है जीवन ,तो वापस लेगा,
मौत से भी न हमको घबराना होगा।।

कोशिश कीजिए कोई मुसाफ़िर न भटके,
रास्ते में इक दीप ही नज़राना होगा।।

फल भी मिलेंगे,साया भी मिल जाएगा,
पौधे लगाएं, कहीं न वीराना होगा।।

अपनों से "अनुराधा" दूर नहीं होती,
शर्त है खुलकर सामने बस आना होगा।।
= अनुराधा सिंह"अनु" राँची, झारखण्ड
 

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