तुम्हारी यादें == किरण मिश्रा

तुम्हारी यादें == किरण मिश्रा

प्रकृति सी अद्भुत,
चन्द्रकला सी अद्वितीय,
नीहारिका  सी कोमल,
गंगा सी निर्मल,
ऋचा सी पावन,
आयत सी पवित्र,.
कुमुदिनी सी धवल,
नाजुक स्मृतियाँ समेटती,
नवेली साँझ सी,.!
सुबह सी छलक जाती है 
रोज मन आँगन में,.!
खिलखिलाती है.. 
बालकनी से झाँकते 
ताम्रवर्णी द्रुम पल्लवों पर 
सुनहली धूप सी !

एक मग कॉफी,
और उतर आती है,
मेरे मन की देहरी पर,
पंख फड़फड़ाती,
चंचल इन्द्रधनुषी तितली  सी !
अनन्या
अनजान डगर की,
जानी पहचानी साथी,
रिश्तों के भँवर में डूबाती उतराती !
नेह की अनन्त गहराई,
और सुकोमल भावों की,
उज्जवल गरिमा.... समेटे..,
सुहासिनी कमला.,
सुवासिनी ...संदला सी,
मधुरा....मुकुला, मनहरणी,
तुम्हारी यादें,

= किरण मिश्रा #स्वयंसिद्वा, नोएडा  
 

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