हे‌रि जाया, फेरी, नंदा मैता कु मुलुक.., बाडों की मुंगरी नंदा, झालों की काखड़ी

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Utkarshexpress.com घाट (चमोली)। सैकड़ों भक्तों के साथ मां नंदा मंगलवार को कैलाश के लिए विदा हो गई। महिलाओं और ध्याणियों ने मां नंदा को जागर और मांगल गीत गाकर विदा किया। महिलाओं ने ऊंचा कैलाशों मां पैटण बैठिगे नंदा तेरा न्यौजा निशाण,  हे‌रि जाया, फेरी, नंदा मैता कु मुलुक, बाडों की मुंगरी नंदा, झालों की काखड़ी, यख दाड़िम माता दांती अखरोट जैसे जागरों से नंदा धाम को नंदामयी कर दिया। ध्याणियों ने माता को श्रृंगार सामग्री अर्पित की और अपने परिवार की कुशलता की कामना की। मंगलवार से चमोली जनपद के गांव-गांव में मां नंदा की छंतो‌लियां भी बुग्यालों के लिए प्रस्थान कर चुकी हैं। गांव के गांव मां नंदा की थीत भक्ति में ढूब गए हैं। सिद्घपीठ कुरुड़ मंदिर समिति ने 25 पुजारियों की टीम बनाई हुई है। ये पुजारी दोनों डोलियों के साथ में बालपाटा और बैदनी बुग्याल तक जाएंगे। 13 सितंबर को नंदा सप्तमी पर बैदनी कुंड और बालपाटा बुग्याल में मां नंदा की विशेष पूजाएं आयोजित होंगी। मां नंदा अपने पहले पड़ाव चरबंग और फरखेत गांव पहुंच गई हैं।  

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