बच्चों के लिए भगवान कृष्ण की कुछ कहानियॉं - झरना माथुर 

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भगवान कृष्ण बच्चों और व्यसकों , सभी के बीच सबसे लोकप्रिय हिंदू भगवानों में से एक हैं। उनकी कहानियों में मज़ेदार, हँसी और अच्छे आदर्शों से भरे किस्से हैं। यहाँ बच्चों के आनंद के लिए भगवान की कुछ विशेष कहानियां।
1. कृष्ण के माता–पिता की कहानी -  प्राचीन काल में, ‘उग्रसेन’ नाम का एक राजा था, जिसके दो बच्चे थे – ‘कंस’ नाम का एक बेटा और ‘देवकी’ नाम की एक बेटी। देवकी नम्र और शांत स्वभाव की थी, लेकिन कंस दुष्ट था। जब वह बड़ा हुआ, तो उसने अपने पिता को क़ैदख़ाने में डाल दिया, और राजा की गद्दी खुद संभाली, जबकि उसकी बहन की शादी राजा ‘वासुदेव’ से हुई।
एक दिन, कंस ने एक आकाशवाणी सुनी – तुम्हारी बहन का आठवाँ पुत्र बड़ा होने पर एक दिन तुम्हारी हत्या करेगा। इससे दुष्ट कंस डर के मारे अंदर तक हिल गया और वह अपनी बहन को मारना चाहता था। लेकिन वासुदेव ने देवकी को जिंदा रखने का आग्रह किया और कंस द्वारा देवकी के आठवें पुत्र को मारने के लिए सहमत हुए। कंस ने अपनी ही बहन और उसके पति को कैद कर लिया, दंपति की आठवीं संतान भगवान कृष्ण थे जो कंस द्वारा उन्हें मारने के लिए किए गए सभी प्रयासों से बच गए और अंत में उन्होंने अपने दुष्ट मामा को परास्त कर दिया।
सीख – यदि आप बुरे हैं और आपके बुरे इरादे हैं, तो आपको अपने पापों की सज़ा ज़रूर मिलेगी। हमेशा सकारात्मक रहें और दूसरों का भला करने के बारे में सोचें।
2. भगवान कृष्ण का जन्म - देवकी और वासुदेव उनके भाई कंस द्वारा कैद किए गए थे। हर बार जब देवकी एक बच्चे को जन्म देती, कंस खुद आ जाता और अपने हाथों से बच्चे को मार देता था । देवकी के सातवें बेटे का गर्भपात हुआ, लेकिन वह रहस्यमयी तरीके से वृंदावन की रानी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित हो गया, जो कृष्ण के भाई – बलराम के रूप में दुनिया में आए।
उनके आंठवे पुत्र का जन्म आधी रात को जेल के भीतर हुआ, यह भगवान कृष्ण थे और उस विशेष दिन को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
सीख – अगर कुछ अच्छा होना है, तो वह होकर रहेगा । अच्छाई हमेशा बुराई पर हावी होती है।
3. वासुदेव ने कृष्ण के जीवन को कैसे बचाया - कृष्ण का जन्म विष्णु के रूप में हुआ था और उनके माता–पिता ने प्रार्थना की थी कि वह एक साधारण बच्चे में बदल जाएं, ताकि वे उसे कंस से छिपा सकें। प्रभु ने अपने पिता को उन्हें वृंदावन ले जाने और एक नवजात बच्ची के साथ अदला–बदली करने की सलाह दी। फिर, जादुई रूप से क़ैदख़ाने के पहरेदार सो गए और सभी ताले और जंजीरें अपने आप खुल गईं।
वासुदेव छोटे कृष्ण को लेकर वृंदावन के लिए रवाना हो गए। जब वह यमुना नदी के तट पर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि नदी में बाढ़ आई हुई थी। अपने सिर पर छोटे कृष्ण को रखते हुए, जैसे ही वासुदेव ने नदी को पार करने का प्रयास किया और पानी ने जैसे ही कृष्ण के पैर की अंगूठे को छुआ यहाँ पर भी रहस्यमयी तरीके से नदी का पानी पीछे हट गया जिससे वासुदेव अपनी यात्रा पूरी कर सके। वह फिर यशोदा के घर पहुँचे, बच्चों की अदला–बदली की और बच्ची के साथ वापस क़ैदख़ाने लौट आए। देवकी और वासुदेव को उम्मीद थी कि कंस लड़की को छोड़ देगा क्योंकि भविष्यवाणी थी कि एक लड़का कंस को मारेगा, लेकिन कंस ने परवाह नहीं की। उसने बच्चे को उनके हाथों से छीन लिया और उसे एक पत्थर पर फेंक कर मार दिया। लेकिन लड़की देवी दुर्गा में बदल गई और उन्होंने कंस को बताया कि कृष्ण जीवित हैं और उसे उसके बुरे कर्मों के लिए उसे दंडित करेंगे।
सीख – कभी–कभी शक्तियाँ खुद के नियंत्रण से परे होती हैं। यदि आपके केवल बुरे इरादे हैं, तो आप कभी भी सफल नहीं होंगे।
4. कृष्ण और राक्षसी पुतना - कृष्ण के मामा कंस उसे मारने के लिए बेताब थे, इसलिए उन्होंने ‘पुतना’ नामक एक राक्षसी को यह कार्य सौंपा। राक्षसी ने एक सुंदर महिला का रूप धारण किया और उस कमरे में जा पहुँची जहाँ कृष्ण थे।
उसने अपने स्तनों पर जहर लेपा हुआ था और कृष्ण को दूध पिलाने का अनुरोध किया। कृष्ण की माँ को उसके असली इरादों का पता नहीं था और उन्होंने पुतना को दूध पिलाने की अनुमति दे दी। लेकिन कृष्ण ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस राक्षसी के जीवन को चूस लिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। विष ने कृष्ण का कुछ नहीं बिगाड़ा लेकिन कृष्ण को दूध पिलाने का अच्छा कर्म करने के कारण, पुतना की आत्मा को मुक्ति मिल गई।
सीख – कभी भी किसी को जान–बूझकर चोट नहीं पहुँचानी चाहिए, क्योंकि आपको इसके लिए भुगतना पड़ सकता है।
5. भगवान कृष्ण का मक्खन पसंद करना - भगवान कृष्ण को मक्खन खाना बहुत पसंद था, वृंदावन शहर में हर कोई उनकी शरारतों और मक्खन चुराने के प्रयासों से वाकिफ था इसीलिए उन्हें “माखन चोर” कहा जाता था। कृष्ण की माँ यशोदा कृष्ण से मक्खन को छुपाने के लिए इसे ऊँचाई पर बाँध देती थीं।
एक बार, जब यशोदा आसपास नहीं थीं तो कृष्ण ने अपने दोस्तों को बुलाया। वे एक दूसरे के ऊपर चढ़ गए और कैसे भी वह मक्खन के बर्तन तक पहुँचने में कामयाब रहे। सभी ने मिलकर मक्खन से भरा बर्तन नीचे उतार लिया और बड़े मज़े से मक्खन को मिल–बाँट कर खाया। लेकिन दुर्भाग्य से, उन्हें एहसास नहीं हुआ कि यशोदा वापस आ गई हैं। कृष्ण के सभी दोस्त वापस अपने घरों में भाग गए, लेकिन कृष्ण को शरारती होने के लिए फटकार पड़ी।
सीख – हमेशा अपने से बड़ों की बात मानें और कभी चोरी न करें।
6. भगवान कृष्ण और यशोदा - भगवान कृष्ण शरारती थे और उनकी माँ यशोदा उनकी शरारतों से थक चुकी थीं। एक दिन, उन्होंने कृष्ण की हरकतों को रोकने के लिए उन्हें बाँधने का फैसला किया। यशोदा उन्हें बाँधने के लिए एक रस्सी लाईं, लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि रस्सी बहुत छोटी थी। वह फिर एक बड़ी रस्सी ले आईं , लेकिन वह भी छोटी पड़ गई। इसके बाद तीसरी रस्सी लाईं, लेकिन वह भी कम पड़ गई। तब उन्हें एहसास हुआ कि उनका बेटा कुछ चमत्कारी है। लेकिन उसके बाद, भगवान कृष्ण ने अपनी माँ को उन्हें बाँधने दिया ताकि वह खुश हो सकें।
सीख – चमत्कार में विश्वास करें, वे हो सकते हैं। हमेशा ऐसे काम करें जिससे आप अपने माता–पिता को खुश कर सकें।

- झरना माथुर, देहरादून 

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