चीन व नेपाल की सीमा से सटे उत्तराखंड के पांच जिलों में जल्द विकास शुरु

चीन व नेपाल की सीमा से सटे उत्तराखंड के पांच जिलों में जल्द विकास शुरु

चीन व नेपाल की सीमा से सटे उत्तराखंड के पांच जिलों के नौ ब्लाकों की जल्द ही तस्वीर बदलेगी। सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के तहत केंद्र सरकार तो वहां के विकास पर ध्यान केंद्रित कर ही रही, राज्य सरकार ने भी मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत इन ब्लाकों में आजीविका विकास के साथ ही स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में ही 20 करोड़ का प्रविधान किया गया है। जाहिर है कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से इन सीमांत ब्लाकों के गांवों से पलायन को थामने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड के गांवों से हो रहे पलायन से सीमांत गांव भी अछूते नहीं हैं। पलायन आयोग की रिपोर्ट ही बताती है कि एक दर्जन से अधिक सीमांत गांवों से पलायन हुआ है। ऐसे में चिंता भी बढ़ गई है। सीमांत गांवों से पलायन को किसी भी दशा में उचित नहीं ठहराया जा सकता। जाहिर है कि इसे थामने के लिए वहां सुविधाओं के विकास के साथ ही आजीविका और स्वरोजगार के अवसरों पर खास फोकस करना बेहद आवश्यक है।  केंद्र सरकार ने भी इसे समझा और राज्य के पांच जिलों के नौ ब्लाकों को बीएडीपी में शामिल करते हुए वहां के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 पर ही गौर करें तो बीएडीपी के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 में 32.44 करोड़ और 2019-20 में 49.37 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की। दिसंबर 2020 तक दोनों वर्षों की करीब 58 करोड़ रुपये की धनराशि विभिन्न कार्यों में खर्च की जा चुकी थी।

बीएडीपी में चयनित विकासखंड

  • जिला------------विकासखंड
  • चंपावत-----चंपावत व लोहाघाट
  • चमोली------जोशीमठ
  • पिथौरागढ़---धारचूला, मुनस्यारी, मुनाकोट व कनालीछीना
  • ऊधमसिंहनगर---खटीमा
  • उत्तरकाशी-------भटवाड़ी 

 

Share this story