पपीते के पत्ते का रस डेंगू के इलाज में असरदार

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Utkarshexpress.com देहरादून। देश के कई हिस्सों में डेंगू का कहर देखने को मिल रहा है। इस बीमारी में मरीज को तेज बुखार होता है और प्लेटलेट्स गिरने लगती हैं। ऐसे में अगर मरीज पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो उसकी जान पर बन आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू का अभी तक कोई अचूक इलाज नहीं है। ऐसे में डाक्टर बुखार के दवा के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा देते हैं।
वहीं डेंगू से बचने के लिए कई तरह के घरेलू नुस्खे अपनाए जाते हैं, जिनमें से पपीते के पत्तों का रस भी एक है। लेकिन सवाल यह कि पपीते के पत्ते का रस डेंगू के प्रति कितना प्रभावकारी है और इसको लेकर मेडिकल साइंस क्या कहना है।
बता दें कि डाक्टर्स डेंगू के इलाज में पपीते के पत्तों की भूमिका को लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ भी नहीं कहते। एक रिपोर्ट के मुताबिक पपीते के तरल अर्क में पापैन, साइमोपापैन, सिस्टाटीन, एल-टोकोफेरोल, एस्कार्बिक एसिड, फ्रलैवोनायड्स, सियानोजेनिक ग्लूकोसाइड्स और ग्लूकोसिनोटेट्स पाया जाता है। ये सभी एंटीआक्सीडेंट हैं, जो ये एंटी ट्यूमर एक्टिविटी करते हैं। इनसे प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत होता है।
इसके साथ ही पपीते के पत्ते के रस को लेकर जानवरों पर भी अध्ययन किया गया है, इसमें सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बताया गया कि पपीते के पत्तों के रस से जानवरों की सेहत में कई तरह के सुधार देखे गए हैं। खासतौर पर इससे उनमें प्लेटलेट्स और रेड ब्लड सेल की संख्या में वृद्वि देखी गई है।
मलेशिया में इसको लेकर ट्रायल किए गए हैं। इसमें पाया गया कि पपीते के रस दिए जाने के 40 से 48 घंटे बाद प्लेटलेट्स की संख्या में वृद्वि दर्ज की गई। इसी तरह के अन्य परीक्षणों में भी प्लेटलेट्स बढ़ने की बात सामने आई है। हालांकि इस अध्ययन बहुत छोटे स्तर पर किए गए हैं। फिलहाल विज्ञान में पपीते के रस को लेकर कोई ठोस अध्ययन नहीं हैं। वहीं मेडिकल साइंस में इसे एक हर्बल उत्पाद माना जाता है।

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